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    CJP के प्रदर्शन पर दुनिया की नजर, विदेशी मीडिया ने प्रमुखता से दिखाई पुलिस कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली :-
    प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग, हिरासत और सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है, जबकि विदेशी मीडिया ने भी इस घटनाक्रम को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
    20 जुलाई को निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन और तेज हो गया।

    एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उठाए सवाल

    मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने बयान में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की खबरें चिंताजनक हैं। संस्था ने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय हो सके।

    ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी जताई चिंता

    ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए तथा बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने कहा कि बल प्रयोग से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    विदेशी मीडिया में भी प्रमुखता से छपी खबर

    इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी व्यापक कवरेज दी है।

    द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई और आंसू गैस के इस्तेमाल के बावजूद अगले दिन भी बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट में प्रदर्शनकारी संगठनों और दिल्ली पुलिस—दोनों के दावों का उल्लेख किया गया।

    वहीं द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह आंदोलन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के व्यापक असंतोष का भी प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। अखबार ने कहा कि कड़ी पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन जारी रहे।

    दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे

    आंदोलन से जुड़े संगठनों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी घायल हुए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प और पथराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान

    जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसके बावजूद CJP और विभिन्न छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने और अपनी अन्य मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने परिस्थितियों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की।

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