Ropeway Varanasi: वाराणसी रोपवे परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, रथयात्रा–गिरजाघर सेक्शन में रोप बिछाने का काम शुरू
वाराणसी :- शहर की बहुप्रतीक्षित अर्बन रोपवे परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। दूसरे चरण के तहत रथयात्रा से गिरजाघर तक मुख्य रोप (लोड रोप) बिछाने का कार्य शुरू हो गया है। निर्माण एजेंसी के अनुसार सावन माह में रोपवे का ट्रायल रन कराया जाएगा, जिसके साथ व्यापक सुरक्षा परीक्षण भी किए जाएंगे। सभी मानकों पर सफल होने के बाद इसे आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है।
इस परियोजना के शुरू होने पर कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक करीब 3.8 किलोमीटर की दूरी महज 17 मिनट में तय की जा सकेगी। अधिकारियों का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक रोपवे का नियमित संचालन शुरू हो जाएगा।
दूसरे चरण में कुल 148 गंडोलों को लोड रोप पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद तकनीकी और सुरक्षा संबंधी सभी परीक्षण पूरे किए जाएंगे। संचालन और रखरखाव के लिए कार्यदायी संस्था के साथ 15 वर्षों का अनुबंध किया गया है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एक कंसल्टेंट इंजीनियर और एक रोपवे इंस्पेक्टर की तैनाती भी की जाएगी।रोपवे को आधुनिक यूरोपीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। निगरानी के लिए अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाए जा रहे हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में पहले जनरेटर और फिर बैकअप पावर सिस्टम से संचालन जारी रहेगा। यदि दोनों व्यवस्थाएं भी काम नहीं करती हैं, तो गंडोला स्वचालित प्रणाली के जरिए यात्रियों को सुरक्षित रूप से नजदीकी स्टेशन तक पहुंचा देगा।
भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की पर्वतमाला योजना के तहत विकसित यह एशिया का पहला अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस कॉरिडोर में कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा और गोदौलिया यात्री स्टेशन होंगे, जबकि गिरजाघर को तकनीकी स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है। पूरी परियोजना के तहत कुल 29 टावर बनाए गए हैं और इसकी अनुमानित लागत 815.58 करोड़ रुपये है।


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