वाराणसी में गंगा का जलस्तर 10 घंटे में 17 सेमी घटा, बारिश ने बढ़ाई फिर बढ़ने की चिंता
वाराणसी :- काशी में बाढ़ की स्थिति के बीच गंगा के जलस्तर में अब गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार सुबह आठ बजे जलस्तर 69.15 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी घटने का सिलसिला जारी रहा। शाम छह बजे तक जलस्तर में करीब 17 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। हालांकि पहाड़ों और मैदानी इलाकों में जारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद निचले इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। घाटों को पार कर बाढ़ का पानी अब गलियों और सड़कों तक पहुंच चुका है। मणिकर्णिका घाट की गलियों में नाव चलने की स्थिति बनी हुई है और छतों पर शवदाह किया जा रहा है। वहीं हरिश्चंद्र घाट पूरी तरह डूबने के बाद आसपास की गलियों में शवदाह की व्यवस्था की जा रही है।
गंगा किनारे के सभी 86 घाट और कई मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। वरुणा नदी में पलट प्रवाह के कारण तटवर्ती इलाकों में भी पानी घरों तक पहुंच गया है। इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि लगातार बढ़ोतरी के बाद अब गंगा का पानी घट रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए नावों का संचालन बंद रखा गया है। घाटों पर पीए सिस्टम के माध्यम से लगातार लोगों को सावधानी बरतने की सूचना दी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत जल पुलिस और एनडीआरएफ की अतिरिक्त तैनाती की गई है। सावन के दौरान महिला श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए महिला पुलिस अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। एसीपी के मुताबिक, अब तक राहत और बचाव के प्रयासों के दौरान 96 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
हालांकि जलस्तर में फिलहाल गिरावट राहत की खबर है, लेकिन बारिश के बाद गंगा के दोबारा बढ़ने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में घाट और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से लगातार सतर्क रहने की अपील की जा रही है।


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