रक्षाबंधन पर मिठाई होगी महंगी, चीनी के दाम में 30 दिन में 36 रुपये का उछाल
वाराणसी :- रक्षाबंधन और आगामी त्योहारों पर मिठाइयों का स्वाद इस बार महंगाई का असर लिए नजर आ सकता है। चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से मिठाई, चाय, बेकरी और कन्फेक्शनरी कारोबार की लागत बढ़ गई है। फुटकर बाजार में चीनी का भाव पिछले एक महीने में 44 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। यानी 30 दिनों में कीमत में करीब 36 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है।
चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ा है। शहर के अधिकांश मिठाई विक्रेताओं ने कीमतों में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। जो मिठाई पहले 500 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी, उसकी कीमत अब 550 से 575 रुपये तक पहुंच गई है।
रक्षाबंधन पर करीब 12 हजार कुंतल मिठाई की खपत
मिठाई कारोबारियों के अनुसार रक्षाबंधन के अवसर पर वाराणसी में करीब 12 हजार कुंतल मिठाई की खपत होती है। इस दौरान लगभग 100 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतों ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
लहुराबीर के मिठाई कारोबारी शुभम यादव ने बताया कि चीनी महंगी होने से मिठाइयों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। ऐसे में कीमतों में वृद्धि करना कारोबारियों की मजबूरी बन गई है।
चाय कारोबार पर भी बढ़ा दबाव
चीनी की महंगाई का असर चाय कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। गोदौलिया, चौक, मैदागिन, लंका, अर्दली बाजार, शिवपुर, पांडेयपुर, राजघाट, कचहरी और दशाश्वमेध सहित कई क्षेत्रों में चाय की खपत काफी अधिक है। चाय विक्रेताओं का कहना है कि यदि चीनी के दाम जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो चाय की कीमत बढ़ानी पड़ सकती है।
चौक के चाय विक्रेता राजेश यादव के मुताबिक, चाय के दाम बढ़ाने से ग्राहकों पर असर पड़ेगा और कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। इसलिए कारोबारी फिलहाल बढ़ी लागत को किसी तरह संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
11 साल में दोगुने से ज्यादा हुए चीनी के दाम
कारोबारियों के अनुसार वर्ष 2015 में चीनी के उत्पादन में कमी के दौरान इसके दाम करीब 34 रुपये से बढ़कर 38 रुपये प्रति किलोग्राम हुए थे। उस समय कीमत में लगभग चार रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई थी। इसके मुकाबले पिछले 11 वर्षों में चीनी के दाम दोगुने से अधिक बढ़ चुके हैं।
महानगर उद्योग व्यापार समिति के अध्यक्ष अशोक जायसवाल ने कहा कि त्योहारों के मौसम में मिठाई निर्माताओं, बेकरी संचालकों और कन्फेक्शनरी कारोबारियों के सामने उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती है। कारोबारियों को डर है कि कीमतें बढ़ाने पर ग्राहक कम हो सकते हैं, इसलिए कई कारोबारी तत्काल पूरी लागत ग्राहकों पर डालने से बच रहे हैं।
आवक घटने से बढ़े दाम, नवंबर से पहले राहत की उम्मीद कम
विशेश्वरगंज भैरोनाथ व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता के अनुसार थोक मंडियों में चीनी की आपूर्ति और आवक कम होने से कीमतों में तेजी आई है। स्थानीय कारोबारी पंकज अग्रवाल का कहना है कि गन्ने की नई फसल आने और चीनी मिलों में नए पेराई सत्र की शुरुआत के बाद ही आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। नई खेप की पर्याप्त आवक नवंबर से पहले होने की संभावना कम है।
सीमित आयात से मिल सकती है तत्काल राहत
नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड, वाणिज्य मंत्रालय की सदस्य डॉ. स्मिता शाह के अनुसार बढ़ती कीमतों के बीच सीमित मात्रा में चीनी का आयात तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। चीनी मिलों को चीनी उत्पादन के साथ एथेनॉल और बायो-एनर्जी के इंटीग्रेटेड मॉडल पर मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जमाखोरी पर प्रभावी रोक के लिए रियल टाइम स्टॉक और कीमतों की निगरानी जरूरी है। साथ ही किसानों को गन्ने का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी काम करना चाहिए, ताकि भविष्य में आपूर्ति का संकट न बने।

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