वाराणसी में जुलूसे मोहम्मदी को लेकर प्रशासन अलर्ट, नई परंपरा पर रोक; 100 वाहनों की अनुमति
बैठक में बताया गया कि मरकजी दावते इस्लामी जुलूसे मोहम्मदी कमेटी पिछले करीब 28 वर्षों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत जुलूस की अनुमति लेती आ रही है। इस वर्ष भी नबी-ए-करीम की पैदाइश की खुशी में जुलूसे मोहम्मदी अमन, भाईचारे और मिल्लत के संदेश के साथ निकाला जाएगा।
100 वाहनों को मिली अनुमति
बैठक में सदर काजी-ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी को जुलूस की अनुमति से संबंधित जानकारी दी गई। प्रशासन ने इस बार जुलूस में अधिकतम 100 वाहनों को शामिल होने की अनुमति दी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी 100 वाहनों की अनुमति थी, लेकिन निर्धारित संख्या से काफी अधिक वाहन जुलूस में शामिल हो गए थे। इनमें दूसरे जनपदों से आए वाहन भी शामिल थे, जिसके कारण यातायात व्यवस्था को संभालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी को देखते हुए इस बार नियमों का कड़ाई से पालन कराने का निर्णय लिया गया है।मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने लोगों से अपील की कि दूसरे जनपदों से लोग जुलूसे मोहम्मदी में शामिल होने के लिए वाराणसी न आएं, ताकि जुलूस निर्धारित व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके।
100 वाहनों की देनी होगी पूरी जानकारी
पुलिस ने स्पष्ट किया कि अनुमति प्राप्त 100 वाहनों का पूरा विवरण प्रशासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। जुलूस में शामिल होने वाले प्रत्येक वाहन का नंबर और उस वाहन में सवार लोगों के आधार कार्ड का विवरण निर्धारित समय के भीतर एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के कार्यालय में सदर काजी के माध्यम से जमा कराया जाएगा।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जुलूस में दूसरे जिलों के वाहनों को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी
सड़क पर नहीं बांटा जाएगा तबर्रुक
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जुलूस के दौरान तबर्रुक अथवा खाने-पीने की सामग्री वाहनों से वितरित नहीं की जाएगी। इसके लिए सड़क किनारे निर्धारित स्थानों पर स्टॉल लगाकर वितरण करने की व्यवस्था करने को कहा गया है, जिससे जुलूस के मार्ग पर किसी प्रकार की अव्यवस्था या यातायात बाधित होने की स्थिति उत्पन्न न हो।
अमन और भाईचारे के साथ निकलेगा जुलूस
बैठक में मौजूद लोगों ने जुलूसे मोहम्मदी को शांतिपूर्ण, अनुशासित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने का संकल्प लिया। पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी करने की बात कही।
सदर काजी-ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए। उनका संदेश अमन, इंसानियत, भाईचारे और शांति का था। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को मनाई जाने वाली जश्न-ए-पैदाइश का उद्देश्य भी इन्हीं संदेशों को समाज तक पहुंचाना है।उन्होंने लोगों से अपील की कि जुलूसे मोहम्मदी में अनुशासन बनाए रखें, प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें और काशी की गंगा-जमुनी तहजीब, अमन और भाईचारे की मिसाल को कायम रखें।



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