सड़क हादसे में घायल हुए तो इलाज के लिए नहीं होगी पैसों की चिंता, पुलिस बनाएगी पेशेंट आईडी; ₹1.5 लाख तक कैशलेस उपचार
सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल पर आईडी बनाने के मामले में वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस प्रदेश में सबसे आगे है। अब तक शहर में 391 सड़क हादसों को ई-डीएआर पोर्टल से जोड़ा जा चुका है, जबकि 34 पेशेंट आईडी जेनरेट की गई हैं। योजना के तहत 21 घायलों को इसका लाभ भी मिल चुका है। वाराणसी के 141 अस्पताल इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
हादसे के बाद पुलिस करेगी पूरी मदद
सड़क दुर्घटना होने पर सबसे पहले डायल-112 पर सूचना देनी होगी। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस समन्वय के साथ घटनास्थल पर पहुंचेंगे। पुलिस अधिकारी दुर्घटना से संबंधित जरूरी जानकारी ई-डीएआर पोर्टल पर दर्ज करेंगे और घायल की पेशेंट आईडी जेनरेट करेंगे। इसके बाद योजना से जुड़े अस्पताल को इसकी जानकारी मिल जाएगी।
घायल के अस्पताल पहुंचने पर पात्रता के अनुसार उपचार कैशलेस शुरू किया जा सकेगा। अस्पताल को इलाज की राशि टीएमएस (ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होगी।
अस्पताल भी बना सकता है पेशेंट आईडी
किसी दुर्घटना के बाद यदि घायल को सीधे अस्पताल ले जाया गया है तो अस्पताल की ओर से भी पेशेंट आईडी बनाई जा सकती है। हालांकि, इसे संबंधित थाना क्षेत्र के प्रभारी की मंजूरी के बाद ही मान्य माना जाएगा। थाना प्रभारी यह सत्यापित करेंगे कि दुर्घटना उसी क्षेत्र में हुई है और घायल व्यक्ति हादसे में ही चोटिल हुआ है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य योजना में किसी तरह के फर्जी दावे और गलत इस्तेमाल को रोकना है। पुलिस से सत्यापन नहीं होने की स्थिति में योजना के तहत कैशलेस इलाज का लाभ नहीं मिल सकेगा।
ऐसे मिला एक घायल को योजना का लाभ
18 जुलाई को लंका थाना क्षेत्र में रमना टोल प्लाजा के पास दो बाइकों की भिड़ंत में रोहनिया के कुरहुआ निवासी विशाल घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना से संबंधित विवरण दर्ज कर उनकी पेशेंट आईडी जेनरेट कराई। इसके बाद उन्हें हेरीटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया।
इलाज के लिए अस्पताल में जमा कराए गए ₹8,500 भी पेशेंट आईडी बनने के बाद वापस कर दिए गए। इससे घायल को तत्काल आर्थिक राहत मिली।
कैसे मिलेगा कैशलेस इलाज?
- दुर्घटना होते ही डायल-112 पर सूचना दें।
- पुलिस और एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचकर घायल को अस्पताल पहुंचाने में मदद करेंगे।
- पुलिस अधिकारी ई-डीएआर पोर्टल पर हादसे का विवरण दर्ज करेंगे।
- घायल की पेशेंट आईडी जेनरेट की जाएगी।
- आईडी बनते ही योजना से जुड़े अस्पताल को सूचना मिल जाएगी।
- पात्र घायल का उपचार कैशलेस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
- अस्पताल उपचार की राशि टीएमएस पोर्टल के जरिए प्राप्त करेगा।
गोल्डन आवर में इलाज पहुंचाना सबसे जरूरी
पुलिस प्रशासन की ओर से योजना को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में घायल को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के साथ उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति को योजना का लाभ दिलाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। योजना के तहत पात्र घायल को अधिकतम ₹1.50 लाख तक या सात दिनों तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दुर्घटना होने पर तत्काल डायल-112 पर सूचना दें, ताकि पुलिस और एंबुलेंस की मदद से घायल को समय पर इलाज मिल सके।

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