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    काशी विश्वनाथ का रुद्राक्ष शृंगार: डेढ़ लाख दानों से सजेगा बाबा का दिव्य स्वरूप, 27 अगस्त को होगा झूला शृंगार

    वाराणसी :- सावन के अंतिम सोमवार पर काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का विशेष रुद्राक्ष शृंगार किया जाएगा। करीब डेढ़ लाख रुद्राक्ष दानों से बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग और शिव-शक्ति की चल प्रतिमा को सजाया जाएगा। शृंगार पूरा होने के बाद बाबा की विशेष आरती होगी और श्रद्धालुओं को कुछ समय तक इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन कराए जाएंगे।

    अंतिम सोमवार होने के कारण मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बाबा के दर्शन और जलाभिषेक करने का अनुमान है। वहीं, 27 अगस्त को बाबा विश्वनाथ का पारंपरिक झूला शृंगार किया जाएगा।

    घंटों की मेहनत से तैयार होगा रुद्राक्ष स्वरूप

    बाबा के रुद्राक्ष शृंगार की प्रक्रिया सुबह से ही शुरू कर दी गई। चल प्रतिमा को डेढ़ लाख रुद्राक्ष दानों से सजाने में करीब आठ से दस घंटे का समय लगने की संभावना है। शाम तक शृंगार को अंतिम रूप दिया जाएगा। गर्भगृह में चल प्रतिमा के प्रवेश से पहले ही उसे पूरी तरह सुसज्जित कर लिया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार रुद्राक्ष शृंगार को सबसे कठिन और विशेष शृंगारों में माना जाता है।

    गंगा द्वार से प्रवेश बंद

    श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर में प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। गंगा द्वार को छोड़कर अन्य निर्धारित प्रवेश मार्गों से भक्तों को मंदिर तक पहुंचाया जा रहा है। मैदागिन, दशाश्वमेध घाट, चौक, गोदौलिया, बांसफाटक, काशी द्वार, नंदूफेरिया, सिल्को गली और सरस्वती फाटक की ओर से श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था की गई है।

    गोदौलिया से मैदागिन तक नो-व्हीकल जोन बनाया गया है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मंदिर परिसर में तीन चिकित्सा सहायता केंद्र बनाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर निशुल्क एंबुलेंस की सुविधा भी दी जाएगी। अलग-अलग भाषाओं में सहायता के लिए बहुभाषी कर्मचारियों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खोया-पाया केंद्र और सात स्थानों पर एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं।

    घाटों से लेकर कांवड़ मार्ग तक कड़ी निगरानी

    सावन के अंतिम सोमवार को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में कई अस्थायी पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाटों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कांवड़ मार्ग पर लगातार पुलिस पेट्रोलिंग के साथ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर नजर रखने के लिए ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन का फोकस श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ प्रबंधन और घाट क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने पर है।


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