दर्द भरे नौहों संग थम गया ग़म का वक्फा, कमा और जंजीर का मातम कर खुद को किया लहुलुहान, मनेगी ईदे जेहरा की खुशियां....
वाराणसी :- दालमंडी पुरानी अदालत से स्थित शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से साठे का कदीमी जुलूस निकाला गया।इसी के साथ 2 महीना 8 दिन से चले आ रहे ग़म का अय्याम मुकम्मल हो गया और अब शिया वर्ग ईदे जेहरा की खुशियों में डूबा नज़र आएगा। शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से अंजुमन हैदरी चौक की अगुवाई में निकाला गया यह जुलूस दालमंडी, नई सड़क, फटाक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होता हुआ दरगाहे फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। पढ़िए UP PUNCH की एक रिपोर्ट और तस्वीरें व वीडियो...।जुलूस में लियाकत अली, शराफत हुसैन नोहेख्वानी करते हुए चल रहे हैं। जुलूस में अलम, ताबूत, दुलदुल और ऊंट पर हजरत इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना का कुर्ता, इमाम हुसैन के बेटे अली असगर का झूला, अनेक शहीदों का समान प्रतीक के तौर पर दर्शाया गया था। जुलूस नई सड़क पहुंचा तो वहां जंजीर का मातम हुआ। क्या छोटे क्या बड़े, क्या बूढ़े, सब जंजीर का मातम करते हुए इमाम हुसैन से अपनी अकीदत बयां कर रहे थे।
रास्ते में कई स्थानों पर उलेमा की तकरीर हुई। इस जुलूस में मौलाना इरशाद अब्बास नकवी, मौलाना नदीम असगर ने कर्बला के मसायब बयां किए। जुलूस में या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थी है और या हुसैन अलविदा कहते हुए लोग चल रहे थे।
जुलूस में इनकी रही खास मौजूदगी
प्रमुख रूप से असकरी रज़ा सईद, नायाब रज़ा, शाहिद, काजिम रज़ा, नायाब हुसैन,सैयद फिरोज़ हुसैन, हैदर मेहंदी, मुर्तुजा शम्सी, नदीम हुसैन, कमाल रजा, यूशा अब्बास, हसन मेहंदी, अफरोज अख्तर, शब्बीर हुसैन, शकील अहमद जादूगर आदि मौजूद थे।
- मोहम्मद रिजवान

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