रसोई के बजट पर महंगाई की दोहरी मार, प्याज और चीनी के दाम में तेज उछाल
चीनी की कीमतों में बीते दिनों खास तेजी दर्ज की गई है। 12 से 22 अगस्त के बीच देश के प्रमुख शहरों में खुदरा भाव में 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी सामने आई। गुवाहाटी में भाव 71 रुपये किलो तक पहुंच गया, जबकि दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में चीनी 68 से 70 रुपये किलो के आसपास बिक रही है।
प्याज के दाम ने भी बढ़ाई चिंता
चीनी के साथ प्याज की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। जिन बाजारों में कुछ समय पहले प्याज करीब 25 रुपये किलो मिल रहा था, वहां अब इसका भाव 60 रुपये से ऊपर पहुंच गया है। इससे रोजमर्रा की सब्जियों का खर्च बढ़ गया है और घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
चीनी महंगी होने की क्या वजह?
चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन और उपलब्धता से जुड़े कई कारण बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन में गिरावट का अनुमान है। सरकार ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा महंगाई के लिए केवल एथनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार के अनुसार खराब मानसून और गन्ने की पैदावार में कमी भी उत्पादन पर असर डालने वाले प्रमुख कारण हैं।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की मांग बढ़ने से भी बाजार पर दबाव है। अगस्त से नवंबर के बीच कई बड़े त्योहार आने हैं, जिसके चलते मिठाई, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। इसी बीच सरकार ने बड़े डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की है।
आम परिवारों की बढ़ी परेशानी
प्याज और चीनी दोनों रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं हैं। ऐसे में इनके दाम बढ़ने का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घर के मासिक बजट पर भी पड़ता है। सब्जियों से लेकर चाय, नाश्ते और त्योहारों में बनने वाले पकवानों तक, कई चीजों की लागत बढ़ने का दबाव उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
सरकार और बाजार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने तथा कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच बफर स्टॉक बाजार में उतारने और 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए आपूर्ति बढ़ाने की पहल भी की गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन दोनों जरूरी खाद्य वस्तुओं के दामों में राहत मिलती है या महंगाई का दबाव आगे भी जारी रहता है।

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