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    गंगा-वरुणा के बढ़ते जलस्तर से बनारस में बाढ़ का खतरा, निचले इलाकों में घुसा पानी; NDRF ने संभाला मोर्चा

    वाराणसी :- गंगा और वरुणा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने काशी में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। गंगा का पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा है, वहीं वरुणा के पलट प्रवाह से शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। कई घरों में पानी पहुंचने के बाद प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। सावन में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और एनडीआरएफ तथा जल पुलिस की टीमें तैनात हैं।

    केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 69.23 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से करीब एक मीटर नीचे है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। काशी के कई प्रमुख घाटों के निचले हिस्से पानी में डूब चुके हैं और घाट किनारे स्थित मंदिरों तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

    वरुणा के पलट प्रवाह से कई मोहल्ले प्रभावित

    गंगा के साथ वरुणा नदी के बढ़ते दबाव का असर सलारपुर, डिपो, दीनदयालपुर और नक्खी घाट समेत आसपास के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर घरों के भीतर तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें नावों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की मदद कर रही हैं।

    मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार में दिक्कत

    बाढ़ का असर काशी के दोनों प्रमुख महाश्मशान घाटों पर भी पड़ा है। मणिकर्णिका घाट का निचला हिस्सा पानी में डूबने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था ऊपरी हिस्सों में करनी पड़ रही है। हरिश्चंद्र घाट के आसपास जलभराव से गलियों में भी परेशानी बढ़ गई है। लगातार बारिश के कारण लकड़ियां भीगने से अंतिम संस्कार में लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।

    घर छोड़ने को मजबूर परिवार, सुरक्षा की चिंता

    नक्खी घाट और आसपास के इलाकों में पानी बढ़ने से कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर साल वरुणा के उफान और पलट प्रवाह के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या सामने आती है। इस बार गंगा का बढ़ता जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है।

    प्रशासन की टीमें हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई गई है और नदी में किसी भी तरह की अनहोनी रोकने के लिए जल पुलिस तथा एनडीआरएफ की तैनाती की गई है।


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