UP Politics: सादाबाद में आकाश आनंद ने फूंका चुनावी बिगुल, BJP पर साधा निशाना; अखिलेश-राहुल को भी घेरा
हाथरस :- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने लगी है। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है। बसपा के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने सोमवार को हाथरस के सादाबाद में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए पार्टी के चुनावी अभियान का आगाज किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया।
आकाश आनंद ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता को सिर्फ राजनीतिक दावों और वादों के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि सरकार के पिछले कार्यकाल का पूरा हिसाब मांगना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर जनता के बीच सरकार की नीतियों और कामकाज पर चर्चा करने की अपील की।
अखिलेश और राहुल पर आकाश आनंद का तंज
बसपा नेता ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दोनों नेताओं को ‘अंकल’ कहकर संबोधित करते हुए कहा कि उनकी उम्र 30 वर्ष है और दोनों नेता उनसे उम्र में बड़े हैं, इसलिए वह उन्हें अंकल कहते हैं।
आकाश आनंद ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें राहुल गांधी और अखिलेश यादव के राजनीतिक वादों से प्रभावित होने के बजाय अपने मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव के ‘PDA’ नारे को लेकर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तरीके से किया जाता है।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने संविधान को लेकर उनकी राजनीति पर भी टिप्पणी की और उनके दावों पर सवाल उठाए।
सरकारी विज्ञापनों के खर्च पर उठाया सवाल
आकाश आनंद ने प्रदेश की भाजपा सरकार को विज्ञापनों के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार पर जनता के टैक्स का बड़ा हिस्सा खर्च कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विज्ञापनों पर करीब 7 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
बसपा नेता ने सवाल किया कि यदि इतनी बड़ी राशि प्रचार पर खर्च की जा सकती है तो बेरोजगार युवाओं, गरीबों, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं लगाए जा रहे हैं। उन्होंने झांसी के अस्पताल में बच्चों की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
रोजगार और भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार पर हमला
युवाओं के मुद्दे को प्रमुखता देते हुए आकाश आनंद ने सरकारी नौकरियों में खाली पदों और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी पद रिक्त हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ।
पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि सरकार प्रचार पर खर्च होने वाले संसाधनों का इस्तेमाल भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने में करती तो बड़ी संख्या में युवाओं को इसका लाभ मिल सकता था।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए प्रदेश में बड़ी संख्या में स्कूलों के बंद होने का दावा किया और कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर तथा वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ता है।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा
कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश की कानून-व्यवस्था भी आकाश आनंद के निशाने पर रही। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा सहित अपराध नियंत्रण को लेकर भाजपा सरकार से सवाल किए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव के दौरान जनता को नेताओं के भाषण सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास से जुड़े सवाल पूछने चाहिए।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ और गांव स्तर तक संगठन को मजबूत करने तथा लोगों के बीच जाकर बसपा की नीतियों और विचारधारा को पहुंचाने का आह्वान किया।
जनता के वोट को बताया सबसे बड़ी ताकत
अपने संबोधन के अंत में आकाश आनंद ने लोकतंत्र में जनता की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है और चुनाव में अंतिम फैसला जनता के वोट से ही होता है।
उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी शुरू करने और पार्टी के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने की अपील की। सादाबाद से चुनावी अभियान की शुरुआत के साथ बसपा ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और सरकारी खर्च जैसे मुद्दों को अपनी रणनीति के केंद्र में रखने के संकेत दिए हैं।
आकाश आनंद के इस कार्यक्रम से यह संदेश भी देने की कोशिश की गई कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा भाजपा के साथ-साथ सपा और कांग्रेस से भी अलग अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।

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