हरितालिका तीज पर काशी के बाजार गुलजार, 50 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
- साड़ियों और आभूषणों की रही सबसे ज्यादा मांग, गंगा की मिट्टी से बनी मूर्तियों ने खींचा महिलाओं का ध्यान
वाराणसी :- हरितालिका तीज के पर्व पर काशी के बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाओं ने साड़ियों, आभूषणों, सुहाग सामग्री, पूजन सामग्री और सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी की। गोदौलिया, चौक, लक्सा, विशेश्वरगंज, अर्दली बाजार, सिगरा, मलदहिया और लहुराबीर सहित प्रमुख बाजारों में सुबह से देर रात तक ग्राहकों की भीड़ बनी रही। व्यापारिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक, तीज के अवसर पर जिले में विभिन्न कारोबारों को मिलाकर 50 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार हुआ।
साड़ियों की खरीदारी में दिखा उत्साह
महानगर उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री रजनीश कनौजिया के अनुसार, तीज पर कपड़ा बाजार में सबसे अधिक रौनक देखने को मिली। चौक, दशाश्वमेध और लक्सा क्षेत्र के साड़ी प्रतिष्ठानों पर बनारसी, कांजीवरम, जॉर्जेट और बंधेज साड़ियों की खास मांग रही। त्योहारी खरीदारी से साड़ी कारोबार में करीब 18 से 20 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
आभूषण बाजार में भी रही चमक
तीज के मौके पर सर्राफा बाजार में भी खरीदारों की भीड़ रही। उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के महामंत्री किशोर सेठ के मुताबिक, महिलाओं ने हल्के वजन के सोने के आभूषणों के साथ बिछिया, चांदी की पायल और मंगलसूत्र की खरीदारी की। वाराणसी स्वर्णकार व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र सेठ ने बताया कि सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सुहाग से जुड़े पारंपरिक आभूषणों की मांग बनी रही। चांदी के पूजा बर्तन, सिक्के और गणेश जी की प्रतिमाएं भी लोगों ने खरीदीं। आभूषण कारोबार में करीब 12 से 15 करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है।
गंगा की मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की बढ़ी मांग
इस बार तीज से जुड़े पूजन बाजार में पर्यावरण को लेकर जागरूकता भी दिखाई दी। पीओपी की प्रतिमाओं की जगह स्थानीय कारीगरों द्वारा गंगा की मिट्टी से तैयार की गई शिव-पार्वती और गणेश परिवार की हस्तनिर्मित मूर्तियों को लोगों ने प्राथमिकता दी। इनकी कीमत करीब 50 से 500 रुपये तक रही।
तेलियाबाग और राजघाट के कई मूर्तिकारों के यहां देर शाम तक प्रतिमाओं का स्टॉक खत्म हो गया। महिलाओं का कहना था कि मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन जलस्रोतों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प है, इसलिए उन्होंने पारंपरिक प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी।मेहंदी कारोबार में चार गुना तक उछाल
तीज के साथ मेहंदी कलाकारों की भी चांदी रही। विशेश्वरगंज, मलदहिया, सिगरा, लहुराबीर और गोदौलिया में साड़ी शोरूम, ज्वैलरी प्रतिष्ठानों और मॉल के आसपास मेहंदी लगाने वालों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही। डिजाइन और हाथों की मेहंदी के अनुसार कलाकारों ने करीब 500 से 2000 रुपये तक शुल्क लिया।
मेकअप स्टूडियो संचालक आभा साहू के मुताबिक, अरेबिक, राजस्थानी और पारंपरिक डिजाइनों की मांग सबसे अधिक रही। कई स्थानों पर महिलाओं को मेहंदी और मेकअप के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। तीज की खरीदारी ने कपड़ा, सर्राफा, पूजन सामग्री और सौंदर्य कारोबार से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी।


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